तुम ही आदि हो तुम ही अंत भजते तुमको दिग दिगंत। तुम ही आदि हो तुम ही अंत भजते तुमको दिग दिगंत।
मां ही मेरी धरती-अंबर, मां ही सारा जहां ।। मां ही मेरी धरती-अंबर, मां ही सारा जहां ।।
प्राणी प्राण में परमेश्वर का सत्य सत्यार्थ बुद्ध का दिव्य दिव्यार्थ। प्राणी प्राण में परमेश्वर का सत्य सत्यार्थ बुद्ध का दिव्य दिव्यार्थ।
भाई - भाई लड़ रहे और किसान है भ्रष्टाचार का बोलबाला मानवता का मुँह है आज काला। भाई - भाई लड़ रहे और किसान है भ्रष्टाचार का बोलबाला मानवता का मुँह है आज का...
मोह ममता के तानों बानों से बुनी ये जिल्द अपने पन्नों को खुद में जैसे समेटे रखतीं हैं मोह ममता के तानों बानों से बुनी ये जिल्द अपने पन्नों को खुद में जैसे समेटे रख...
न जाने कितनी सदियाँ बीत गई एक युग से दूसरे युग में रीत गई। न जाने कितनी सदियाँ बीत गई एक युग से दूसरे युग में रीत गई।